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कण की कीमत | Short Story in Hindi Moral

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Story in Hindi Moral 

दो रुपये की किमत - Story in Hindi Moral 


नमस्ते दोस्तों आज हम एक बार फिर आपके बीच लेकर आये है, एक प्रेरणादायक कहानी "कण की कीमत Story in hindi moral" जिनको पढ़कर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी अगर स्टोरी आपको अच्छी लगे तो नीचे कमेंट करके जरूर बताए तो चलिए शुरू करते है आज की कहानी । 

दादाजी की कहानी 

दादा जी एक दिन गली में टहल रहे थे, उनकी पोती दिशा भी दादा जी के साथ थी दोनो बाते करते-करते बस अभी चार कदम ही चले थे की दिशा की नजर उस इंसान पर पड़ी  करीब 50-55 की उम्र का एक भिखारी गली में रुक रुक कर आते जाते सभी लोगों से कुछ माँगता फिरता था. फिर दिशा वहा रुक गई और सोचने लगी, दादा जी ने दिशा से पुछा अरे बैठी तुम रुक क्यु गई ....


फिर दिशा ने अपने दादाजी से पूछा दादाजी, आप उस व्यक्ति को देख रहे है, दादाजी ने कहा हां दिशा वो भिखारी है। फिर दिशा ने कहा क्या इस उम्र तक उस व्यक्ति ने ऐसी कोई कोशिश नहीं की होगी की इसे मांगना ना पड़े..? इसने कभी भी सोचा नही होगा की मैं लोगो से मांग क्यु रहा हूँ...?

कण की कीमत- Story in Hindi Moral,

दादाजी दिशा से कुछ कह पाते की इससे पहले वह भिखारी उन दोनो के पास आ गया था, फिर दादाजी ने कुछ न कहा वो व्यक्ति दादा जी तरफ हाथ बढ़ाकर कुछ माँगने लगा भिखारी को मांगता हुआ देखकर दादा जी अपनी जेब टटोलने लगे.. उनके हाथ में सिर्फ दो रुपये का सिक्का लगा दादाजी ने वह सिक्का उस भिखारी को दे दिया....


परंतु यह क्या, उस भिखारी ने जैसे ही देखा कि सिक्का दो रुपए का है. तो बड़ी हिकारता-से दादा जी की तरफ देखा और उनके दिये हुए 2 रूपये के सिक्के को जमीन पर फेंक दिया। और कहने लगा कि आप तो मुझसे भी ज्यादा भिखारी है...दिशा को यह अपमान जनक लगा उसे लगा कि यह व्यक्ति मेरे दादाजी का अपमान कर रहा है उसका चेहरा तमतमा उठा.... Story in hindi moral 


दिशा बहुत गुस्से हो गई थी फिर भिखारी को कुछ  कहने के लिए मुँह खोला तो दादा जी ने उसे बोलने से रोक दिया और कहा दिशा हमे इनकी तरहा नही होना चाहिए फिर उसका हाथ पकड़ कर आगे बढ़ गए। थोड़ा आगे जाकर दादाजी ने दिशा से कहा कि बैठा थोड़ी देर पहले आप मुझे पुछ रही थी ना की इस व्यक्ति ने आज तक ऐसी कोई कोशिश नहीं की होगी की इसे मांगना न पड़े..? इसने कभी भी सोचा नही होगा की मैं लोगो से मांग क्यु रहा हूँ...?

प्रेरणादायक स्टोरी Motivational short story in hindi moral



दिशा बेटा तो इसका जवाब यह है कि जो व्यक्ति कण की कीमत नहीं जानता धन उसके पास कभी नहीं आता. लोग भिखारी इसलिए होते है की वो 2 रूपये की किमत को नही जानते, उस व्यक्ति ने खुद बता दिया कि वह भिखारी क्यों है। जिसने 2 रूपये की किमत नही समझी वो लाखो की किमत को क्या समझेगा.....

Moral: दिशा को जीवन की एक अनमोल सीख मिल गई थी की जिंदगी क्या है जिंदगी की अहमियत क्या है। हमारी आवश्यकता क्या है, अमीर वो लोग होते है जिसके पास दो रुपये की किमत होती है.और भिखारी वो होते है जिसके पास दो रुपये की कीमत नही होती है। उस दो रुपये से हमे कोई फर्क नही पड़ता पर उस दो रुपये को हमारा फर्क जरूर पड़ता है की आखिर उसने मुझे फेंका क्यूं. आप खुद सोचिए समझदार है........


लेखन और संपादन: कहानी रिश्ते की : टीम 

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